लिखेगा क्या कोई शायर हुकूमत अब बतायेगी?
कलम को बदचलन होने से हर कोशिश बचायेगी
लिखेगा क्या कोई शायर हुकूमत अब बतायेगी
मशविरा है या धमकी है गली में है मगर चर्चा
मुखालिफ होगी जो आवाज उसकी जान जायेगी
पहनना क्या है खाना क्या है रहना है किसे कैसे
सलीका साँस लेने का भी पंचायत सिखायेगी
इजाजत इश्क की है सिर्फ मजहब जात के अंदर
सनद अब जात की लैला भी मजनू को दिखायेगी
सियासी आढती बैठे हैं अपनी अपनी आढत पर
रिआया लूटी जायेगी अगर बोली लगायेगी
लिखेगा क्या कोई शायर हुकूमत अब बतायेगी
मशविरा है या धमकी है गली में है मगर चर्चा
मुखालिफ होगी जो आवाज उसकी जान जायेगी
पहनना क्या है खाना क्या है रहना है किसे कैसे
सलीका साँस लेने का भी पंचायत सिखायेगी
इजाजत इश्क की है सिर्फ मजहब जात के अंदर
सनद अब जात की लैला भी मजनू को दिखायेगी
सियासी आढती बैठे हैं अपनी अपनी आढत पर
रिआया लूटी जायेगी अगर बोली लगायेगी

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