Sushil Kr Singh " Surayavanshi"
i Hate THOSE i Love
Tuesday, September 28, 2010
Sunday, September 19, 2010
Thursday, September 9, 2010
कोई शाम आती है तुम्हारी याद लेकर
कोई शाम आती है तुम्हारी याद लेकर,
कोई शाम जाती है तुम्हारी याद देकर,
हमे तो इंतजार है उस शाम का,
जो आए तुम्हे साथ लेकर.........हसते हो आप लेकिन,
हर हसी का मतलब इकरार नही होता,
रोते हो आप लेकिन,हर रोने का मतलब इनकार नही होता,
मिलती है हजारों नजरोंसे नजर लेकिन,
हर नजर का मतलब प्यार नही होता......
मत करो कोई वादा जिसे नीभा ना सको,
मत चाहो उसे जिसे तुम पा ना सको,
प्यार कहां किसीका पुरा होता है?
प्यार का तो पहिला अक्षर ही अधुरा होता है....
मुस्कुराकर जीना जींदगी है,
मुस्कुराकर गम भुलाना जींदगी है,
जीतकर हसे तो क्या हसे,
सब कुछ हारकर मुस्कुराना ही जींदगी है......
गुलने गुलशान से गुलफ़ाम भेजा है,
सितारों ने आसमान से सलाम भेजा है,
मुबारक हो आपको ये जिंदगी,हम ने आपको ये पैगाम भेजा है........
क्यूं कहते हो मेरे साथ कुछ भी बेहतर नही होता
क्यूं कहते हो मेरे साथ कुछ भी बेहतर नही होता
सच ये है के जैसा चाहो वैसा नही होता
कोई सह लेता है कोई कह लेता है क्यूँकी ग़म कभी ज़िंदगी से बढ़ कर नही होता
आज अपनो ने ही सीखा दिया हमे
यहाँ ठोकर देने वाला हैर पत्थर नही होता
क्यूं ज़िंदगी की मुश्क़िलो से हारे बैठे हो
इसके बिना कोई मंज़िल, कोई सफ़र नही होता
कोई तेरे साथ नही है तो भी ग़म ना कर
ख़ुद से बढ़ कर कोई दुनिया में हमसफ़र नही होता
कोई दीवाना कहता
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
मै तुझसे दूर कैसा हू तू मुझसे दूर कैसी है
ये मेरा दिल समझता है या तेरा दिल समझता है
मोहबत्त एक अहसासों की पावन सी कहानी है
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है
यहाँ सब लोग कहते है मेरी आँखों में आसूं है
जो तू समझे तो मोती है जो ना समझे तो पानी है
मै जब भी तेज़ चलता हू नज़ारे छूट जाते है
कोई जब रूप गढ़ता हू तो सांचे टूट जाते है
मै रोता हू तो आकर लोग कन्धा थपथपाते है
मै हँसता हू तो अक्सर लोग मुझसे रूठ जाते है
समंदर पीर का अन्दर लेकिन रो नहीं सकता
ये आसूं प्यार का मोती इसको खो नहीं सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता
भ्रमर कोई कुम्दनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोह्बत्त का
मै किस्से को हक्कीकत में बदल बैठा तो हंगामा
बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेडे सह नहीं पाया
हवाओं के इशारों पर मगर मै बह नहीं पाया
अधूरा अनसुना ही रह गया ये प्यार का किस्सा
कभी तू सुन नहीं पाई कभी मै कह नहीं पाया




